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अनुभूति में कुमार रवींद्र की रचनाएँ

नए गीत-
एक बच्चे ने छुआ
काश! पढ़ पाते
धुर बचपन की याद
बोल रहा घर

गीतों में
अपराधी देव हुए

इसी गली के आखिर में
और दिन भर...

खोज खोज हारे हम
गीत तुम्हारा

ज़रा सुनो तो
पीपल का पात हिला
बहुत पहले
मेघ सेज पर
वानप्रस्थी ये हवाएँ
शपथ तुम्हारी
संतूर बजा
सुनो सागर
हम नए हैं

हाँ सुकन्या

 

हम नए हैं

हम नए हैं
नए थे भी
नए आगे भी रहेंगे

यह हमारा गीत होना
सुनो समयातीत होना है
बन सदाशिव
ज़हर से अमृत बिलोना है
कल दहे थे
दह रहे हैं
कंठ आगे भी दहेंगे

सूर्य के संग यात्रा में
आज या कल नहीं होता
गीत का क्षण है अजन्मा
वह कभी भी नहीं खोता
बह रहे थे
कल बहे थे
जल हमेशा ही बहेंगे

सत्य वह है
जो रहा सुंदर हमेशा
वह नहीं जिसके सदा ही
बीतने का अंदेशा
कल कहा था
कह रहे हैं
यही कल भी हम कहेंगे।

1 मई 2007

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