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  बेबसी

चाँद से
मुट्ठी भर चाँदनी
उधार ले आई,
हृदय के उन कोनों को
उजागर करने के लिए,
जहाँ भावनाएँ रावण बन
सामाजिक मर्यादायों की
लक्ष्मण - रेखा पार है करना चाहतीं
और मन सीता-सा
इन्कार करता हुआ भी छला जाता है।

३० नवंबर २००९

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