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संकलन में—
वर्षा मंगल–डरा पक्षी

 

सीमा पार

तब समय की एक अलग
धड़कन थी।

पगडंडी पहाड़ के पार
एक घाटी में आई।

झूमते
विशाल वृक्षों के नीचे
जहाँ खुला स्थान था,
और घूमता झरना था।

अब यह नगर है।
विशाल भवनों के मध्य
पर्यटकों के लिए
एक छोटी धारा है।
पर गगनचुंबी महालय
हवा में लहराते नहीं।

स्तब्धता है
समय के ताल में अब
एक व्याकुलता।

मन क्षोभ और भय के बीच
खिंच रहा है।

16 जनवरी 2007

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