अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में सुभाष काक की कविताएँ- 

नई कविताएँ-
एक सहेली
ग्रहण
चंद्रमा
जंगल में आग
नगर
नयनों का कोना
संवाद
सीमा पार


कविताओं में-
अंगारों का रास्ता
अनुराग और द्वेष
अश्वताल
इतिहास पुराण
एक और युद्ध
पत्ते और भाव
प्रेम का संकेत
पशु विदाई
रंग अंधेरे में
श्वेत फूल

संकलन में—
वर्षा मंगल–डरा पक्षी

 

 

अनुराग और द्वेष

मैं तुमसे अब प्रेम नहीं करता
यह सच है‚
भले ही मुझे तुम्हारी याद
आती है।

मुझे तुमसे द्वेष है अब‚
यद्यपि यह द्वेष
प्रेम का चिह्न है।

जो मैं तुम्हें
चाहता नहीं‚
तुम भी मुझे
भूल गई।

मुझे तुमसे प्रेम था‚
और कदाचित
तुम्हें भी कभी
मुझसे प्रेम था।
पर तुमने मेरा नाम
अपने हृदय से
मिटा दिया‚
मैं भी दूर देश
तुम्हारा अपवाद
करता हूँ।

परंतु यदि तुम्हारी दृष्टि
वाटिका के दूर कोने में
उस पेड़ पर पहुँचकर
जो मैंने बोया था
स्मृति को जगाए
और तुम मेरा नाम लो
मैं तत्काल चला आऊँगा।

1 जनवरी 2006

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter