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  बयार

भावनाओं की गर्म बयार
हवा में भी है चिनचिनाहट।

उष्णता बढ़ी
झकझोर दिया
अवनी के झंझावातों ने।
झुलस गया मन
स्निग्धता गयी झुलस
हो गयी विरक्त हूँ
सांसारिक बनाव से।

गर्मी का पवन तपन का मौसम।
मोह नष्ट हो रहा हो रहा विलगाव
कृत्रिम लगाव से।
रवि के रूप प्रचंड
देख रही ये आँखे
अम्बर को
कब आती रिमझिम फुहारें।

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