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सामीप्य

सामीप्य तेरा गंतव्य लाने में
रिश्तों ने
प्यार के मज़बूत पैरों पर
अंतरंग क्षणों की
कितनी दौड़ें लगाई होंगीं
तब कहीं प्रगाढ़ता
मिलन के दहलीज़ पर आई होगी!
पर 'दूरी बनाए रखे'
जैसी चेतावनी ने
सचेत ही नहीं किया
बल्कि ये ताक़ीद भी की
कि साँस छूती नज़दीकियों से
हर्ष कुछ फासला बनाये रखे
ताकि परिणाम शून्य से
नीचे ना चला जाए
और अपने ही तराजू पर
भय के बटखरे से
पासंगाई तौल में
हल्का ना दिखाई दे!

१८ फरवरी २००८

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