अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में जयप्रकाश मानस की रचनाएँ—

नयी रचनाओं में-
आम आदमी का सामान्य ज्ञान
गिरूँगा तो उठूँगा
जब कभी होगा जिक्र मेरा
तब तक
निहायत छोटा आदमी

छंदमुक्त में—
अंधा कुआँ
अभिसार
आकाश की आत्मकथा
चौपाल
नदी
पाँच छोटी कविताएँ
पुरखे
प्रायश्चित
बचे रहेंगे सबसे अच्छे
वज़न

क्षणिकाओं में—
छाँव निवासी
बाज़ार

पहाड़

पाठ

 

नदी

नदी
हमारे सपनों में गुनगुनाती है अंतहीन लोकगीत
गीतों में गमकते हैं
कछारी माटी वाले हमारे सपने
पहुँचाती है पुरखों तक
अंजुरी भर कुशल क्षेम
दोने भर रोशनी

हमारी बहू-बेटियों की मनौतियों की
निर्मल चिठ्ठी के लिए
जनम-जनम बनती है डाकिया
पूछती फिरती है सही-सही पता
बाधाओं के पहाड़ लाँघकर
नदी अन्न के भीतर पैठ कर पहुँचती है
हमारे जीवन में
अथाह ऊर्जा के साथ

सभी के काम पर गुम हो जाने के बाद भी
बच्चों के आसपास रहती है कोई
तो
वह नदी ही है माँ की तरह
हमारे बच्चे अनाथ हुए बिना
रचते रहेंगे दोनों तटों पर गाँव
गाँव की दुनिया में मेले
जब तक उमड़ती रहेगी नदी
उनमें सतत

१ अप्रैल २००६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter