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२. ३. २००९

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जय हो!

  लूट मार के बाद सभी का अपना हिस्सा तय हो
जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो

दल बदलू वोटों की जय हो
संसद में नोटों की जय हो
लोकतंत्र की इस चौपड़ में
अमरीकी गोटों की जय हो
सीनाजोरी करता फिरता हर दलाल निर्भय हो
जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो

सच पर प्रतिबंधों की जय हो
जाँचों के अन्धों की जय हो
लोकतंत्र के नाम चल रहे
सब काले धंधों की जय हो
मतलब तो सीधा सपाट पर पेंचदार आशय हो
जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो

पंजों की कमलों की जय हो
काँटों के गमलों की जय हो
कन्याओं पर राम नाम की
सेना के हमलों की जय हो
गूंगी जनता बहरा शासन अंधा न्यायालय हो
जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो जय हो

-- वीरेन्द्र जैन

इस सप्ताह

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२३ फरवरी २००९ के अंक में

गीतों में-
महेन्द्र भटनागर

पुनर्पाठ में-
आलोक श्रीवास्तव

दोहों में-
राम निवास मानव

छंद मुक्त में-
कविता रावत

नई हवा में-
प्रियोबती निंथौजा

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
-|- सहयोग : दीपिका जोशी
 
३०,००० से अधिक कविताओं का संकलन
   
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