प्रत्येक सोमवार को प्रकाशित
 
पत्र व्यवहार का पता

अभिव्यक्ति  

२३. २. २००९

अंजुमन । उपहार । काव्य संगम । गीत । गौरव ग्राम । गौरवग्रंथ । दोहे । पुराने अंक । संकलन । हाइकु
अभिव्यक्ति । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर

यह न समझो1

  यह न समझो कूल मुझको मिल गया
आज भी जीवन-सरित मझधार में हूँ!

प्यार मुझको धार से
धार के हर वार से,
प्यार है बजते हुए
हर लहर के तार से,

यह न समझो घर सुरक्षित मिल गया
आज भी उघरे हुए संसार में हूँ!

प्यार भूले गान से,
प्यार हत अरमान से,
ज़िन्दगी में हर कदम
हर नए तूफ़ान से,

यह न समझो इंद्र-उपवन मिल गया
आज भी वीरान में, पतझार में हूँ!

खोजता हूँ नव-किरन
रुपहला जगमग गगन,
चाहता हूँ देखना
एक प्यारा-सा सपन,

यह न समझो चाँद मुझको मिल गया
आज भी चारों तरफ़ अँधियार में हूँ!

-- डॉ. महेन्द्र भटनागर

इस सप्ताह

गीतों में-

पुनर्पाठ में-

दोहों में-

छंद मुक्त में-

नई हवा में-

पिछले सप्ताह
१६ फरवरी २००९ के अंक में

गीतों में-

दिशांतर में-

छंद मुक्त में-

दोहों में-

पुनर्पाठ में-

अन्य पुराने अंक

अंजुमन । उपहार । काव्य संगम । गीत । गौरव ग्राम । गौरवग्रंथ । दोहे । पुराने अंक । संकलन । हाइकु
अभिव्यक्ति । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इस में प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है।

अपने विचार — पढ़ें लिखें

 

Google

Search WWW  Search anubhuti-hindi.org
प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
-|- सहयोग : दीपिका जोशी
 
३०,००० से अधिक कविताओं का संकलन
   
१६ २४ ००९ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ ०