अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में सचिन त्रिपाठी की रचनाएँ—

हास्य व्यंग्य में-
इंटरव्यू
कसाई
धन्नो
भूत
सपना

 

 

 

 

कसाई

ये क्या हो रहा है भाई
ये क्या हो रहा है भाई
आदमी बन गया कसाई
ये क्या हो रहा है भाई
छोटे-छोटे मासूमों को
टुकड़ों में काटा
उन हिस्सों को ना जाने
कितनों ने बाटा
ज़मीर के दलाल

आज भी मौन है
कोई नहीं जानता
वो कौन है वो कौन है
आ गए चुनाव फिर
मिल गया मुद्दा नया
लाशों पर होगी राजनीति
बिना दया बिना हया
ये क्या हो रहा है भाई
ये क्या हो रहा है भाई

09 फरवरी 2007

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter