अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में अखिलेश सिन्हा की रचनाएँ

छंदमुक्त में-
मोक्ष
प्रेम
हिन्दू मुस्लिम

  मोक्ष

बड़ी सहजता से कल
जला ड़ालीं उसने
पाठशाला की पुस्तकें
हर एक पुस्तक से
निकली धुन एक निराली सी
बढ़ती ही गयी जो
लपटों के संग संग
उस पर गीत मादक गाए
उन अधजली पुस्तकों के
थिरकते बहकते पन्नों ने
और मैं
चकित
विस्मृत
आह्लादित
उन खूबसूरत लपटों से लिपट
बेहिसाब नाच उठा।

१ जनवरी २००१

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter