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गीतों में-
गाँव
प्यास नदी की
मन का उपवन
मन-वृंदावन

सोया शहर

नए दोहे-
यह जीवन बहुरूपिया

कुंडलियों में-
कुंडलियाँ (अपनी अपनी अहमियत)

नए दोहे-
दोहे

हाइकु में-
हाइकु सुखद भोर

 

मन का उपवन

तुम आए तो
मन का उपवन
महक गया।

उड़ने लगीं
तितलियाँ सुख की ,
खिले कमल
पाकर तुम्हें
थिरकता रहता
मन चंचल

प्रेम-गंध पा
मुग्ध भ्रमर - मन
बहक गया।

कुछ खुशबू,
कुछ रंग प्यार के,
गये बरस
सारा जीवन
मधुमय होकर
हुआ सरस

सुर्ख गुलाब
खिला चेहरे पर
दहक गया

२३ अप्रैल २०१२

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