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यतीन्द्र राही

 

अनुभूति में यतीन्द्र राही की रचनाएँ

गीतों में-
उपवन को ही ज्ञात नहीं
कोई उत्सव नहीं मना
बिलकुल बंजर

अंजुमन में-
डरा डरा घबराया दिन

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