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अनुभूति में डॉ० तारा प्रकाश जोशी की रचनाएँ-

गीतों में-
कोई और छाँव देखेंगे
तेरे मेरे बीच
मेरे पाँव तुम्हारी गति हो
मेरा वेतन ऐसे रानी

संकलन में-
मातृ भाषा के प्रति- हिंदी में बोलूँ

 

मेरे पाँव तुम्हारी गति हो

मेरे पाँव तुम्हारी गति हो
फिर चाहे जो भी परिणति हो

कोई चलता कोई थमता
दुनिया तो सडकों का मेला
जैसे कोई खेल रहा हो
सीढ़ी और साँप का खेला
मेरे दाँव तुम्हारी मति हो
फिर चाहे जय हो या क्षति हो

पल-पल दिखते पल-पल ओझल
सारे सफर पडावों के छल
जैसे धूप तले मरुथल में
हर प्यासे के हिस्से मृगजल
मेरे नयन तुम्हारी द्युति हो
फिर कोई आकृति अनुकृति हो

क्या राजाघर क्या जलसाघर
मैं अपनी लागी का चाकर
जैसे भटका हुआ पुजारी
ढूँढ रहा अपना पूजाघर
मेरे प्राण तुम्हारी रति हो
फिर कैसी भी सुरति-निरति हो

ये सन्नाटे ये कोलाहल
कविता जन्मे साँकल-साँकल
जैसे दावानल में हँस दे
कोई पहली-पहली कोंपल
मेरे शब्द तुम्हारी श्रुति हो
यह मेरी अन्तिम प्रतिश्रुति हो

२७ जनवरी २०१४

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