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गीतों में-
गाने दो
तेरी बातें कब होंगी
ये दूकाने हैं
शहर
सुबह सुबह अखबार

  तेरी बातें कब होंगी

हर दम मेरी बातें
तेरी बातें कब होंगी

बातों का सिलसिला
इधर से ही
क्यों चलता है
तेरे सिर तक
आते-आते
पानी ढलता है
यहाँ-वहाँ सब तरफ
एक बरसातें
कब होंगी

चटक-मटक कपड़ों में
छिप जाती हैं
तस्वीरें
खुले हुए चेहरे से
दिख जाती हैं
सब पीरें
पीरों को नींद
सुलाने वाली रातें
कब होंगी

१२ दिसंबर २०११

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