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ठंडी ठंडी फुहार
जीवन एक अँधेरा कमरा
ये पौधे पेड़ बनेंगे
लगाकर आग जंगल में

गीतों में-
इच्छा
नदी

 

नदी

जिसने चाहा किया उसी ने
पार नदी को

पूजा उत्सव
सभी व्यवस्था
पहले जैसी
दान दक्षिणा
सन्त भक्त
गणिकाएँ विदुषी
युगों युगों से
रहे निरंतर तार नदी को

सभी कुशल तैराक
नहीं होते
नाहक की
विजयी होने की
उनकी इच्छाएँ
सतही
कभी न भाया
यह दैहिक व्यापार नदी को

सहमति वाली नाव
असहमति वाले
पुल से
बालू के विस्तार
और मटमैले जल से
समय दे रहा है
अजीब आकार नदी को

२५ अगस्त २००८

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