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छंदमुक्त में-
स्वयंवर
इबारत प्यार की
पतंग
मोहब्बत के सिक्के
रूह की आज़ादी

 

स्वयंवर

दरख़्त इन दिनों हर रोज़
नई -नई पोशाकें बदलते दीखते है
फिर ज़र्द से सुर्ख
बहार की दुल्हन कौन से
रंग की पोशाक में
इन्हें दूल्हा चुनना चाहेगी
कतारों में खड़े हैं
सारे शहजादे
आनेवाली शहजादी के इंतज़ार में
जो "वर-माला " हाथों में लिए
बस आती ही होगी।

२३ अगस्त २०१०

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