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हवा और पानी

हवा और पानी
तुम हो कितने दानी
इस जीवन की साँस हो तुम
तपती धरती के आस हो तुम
हवा चले झोंके से तो तू
उपवन की मलय बयार बने
जब इठला कर चलता पानी
तो वह नदिया की धार बने
हवा तेरी फूँक जगाती
वादन का संगीत
पानी तेरी कल–कल ध्वनि ने
गाए कितने गीत
न जाने किसके है
दो हाथ वरदानी
यह हवा और पानी

८ सितंबर २००३

 

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