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अनुभूति में जैनन प्रसाद की रचनाएँ— 

छंदमुक्त में—
एक नारी
कैसे भुलाऊँ तुम्हें
खड़ाऊँ
गुरु दक्षिणा
चीर हरण
मछली
मेरा मन
रावण या राम

हास्य व्यंग्य में—
उठो जी
एक नेता
झूठ
बैठ जाओ

 

चीरहरण

हँस रहे हैं आज
कई दुशासन।
द्रोपदी को निवस्त्र देख।
और झुके हुए हैं
गर्दन वीरों के।
सोच रहें है!
इस आधुनिक जुग में
कैसे वार करें
तीरों के।
चीखती हुई उस
अबला की पुकार का दर्द
सभी को खल रहा है।
आज कृष्ण की जगह
लोगों में
दुर्योधन पल रहा है।

१ फरवरी २००६

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