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वसंत

सोचा था
लिखूँगी
गीत एक वसंत का
कोयल की कूक का
भँवरे की गुंजन का
लहराते वृक्षों का
झूमते फूलों का
कान्ह की बाँसुरी का
राधे की पिचकारी का
और
कलम जो उठाई
दीख गया सामने
कंकाल एक भूख का
अब कहो
क्या लिखूँ
गीत एक वसंत का?

24 अगस्त 2007

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