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मेरी जां हिंदुस्तान

दिल हिंदुस्तान मेरी जां हिंदुस्तान
धरती ये पुकार आसमां हिंदुस्तान।।

नफ़रतों का देता है मोहब्बत से जवाब
बारूदों की छाती पे खिलाता है गुलाब
दुनियाँ में अनोखा बगबाँ हिंदुस्तान।
धरती ये पुकारे आसमां हिंदुस्तान।।

धूप गुलामी की हरगिज़ न तुझको जला सकेगी
आज़ादी की छाया तेरे सर पे सदा रहेगी
तुझपे है कुर्बान हर जवां हिंदुस्तान
धरती ये पुकारे आसमां हिंदुस्तान।।

बम के बने ज़खीरे चाहे हो बंदूक की खेती
गाँधी - गौतम की बातें ही मन को शांति देती
दुनिया में अमन का पाशवां हिंदुस्तान
धरती ये पुकारे आसमां हिंदुस्तान।।

१६ अगस्त २००६

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