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भय है

भय है
शिथिल होने का
परंपरा से चली आ रही
परिपाटी के अंग होने का
भय है
मृत्यु का नहीं लम्बी वय का
'पाश' रह रह कर
तुम्हारी वो पंक्तियाँ याद आती है-
'न होना तड़प का
सब सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौट कर घर जाना
सबसे खतरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना'
भय है
इन्हीं सपनों के मर जाने का
पूरी तरह सरकारी कर्मचारी बन जाने का
भय है
दलाली के धंधों को इतने
करीब से देखते रहने के बावजूद
चुपचाप सन्नाटे में घिरे रहने के बावजूद
हर ख़ुशी से जुदा रहने के बावजूद
अपने वजूद को कायम रखने
के जज्बे के बावजूद
भय है
बहुत सी दीवारों के ढहने के बावजूद
चंद कटीली झाड़ियों में उलझने का
भय है
मीठी सी नींद में बहने का
भय है

१३ जून २०११

 

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