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एक अधूरी खोज
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अंतर्द्वंद्व
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सर्द सुबह

छंदमुक्त में-
अतीत का झरोखा
खोज
बबूल
संभावना

सीलन

 

एक अधूरी खोज

पूर्ण प्रेम की खोज सदा से
रही अधूरी है
रहे भटकते, मिली न फिर भी
ये कस्तूरी है

बाहर उत्सव सा कोलाहल
सन्नाटा भीतर
अभिलाषाएँ जड़ी हुई हैं
बस दीवारों पर

जीवन का पर्याय यहाँ पर
सिर्फ सबूरी है

घुलनशील कितने भी हों मन
प्रेम भरे जल में
रह जाते हैं फिर भी कुछ कण
बर्तन के तल में

पूर्ण मिलन की परिभाषा में
विरह ज़रूरी है 

१ दिसंबर २०१८

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