अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में राजेश पंकज की
रचनाएँ—

छंदमुक्त में-
अश्रुगाथा
गणित
परी कथाएँ
संकलन में-
मातृभाषा के प्रति - देवनागरी

 

 

परी कथाएँ

मैं आज से रचूँगा
परी कथाएँ।
आप लोग चाहें
तो समझ ले मुझको
पलायनवादी या कुछ और।
यथार्थ को चित्रित कर
अपने साहित्य को
समाज का आईना बनाते-बनाते
मैं ऊब चुका हूँ।
मेरी लेखनी को
उबकाई आ जाती है,
जब आप लोग मेरी नायिका के
यौन-शोषण के चित्र को देख
चटखारा लेते हैं,
और आशा करते हैं
मेरी और भी अधिक
विस्फोटक रचना की।
मैं इस समाज की
सडांध भरी भूमि पर
बोना चाहता हूँ
स्वप्नों की फसल।
आज से मेरी कथाओं में होंगे,
केवल स्वप्नों के राजकुमार
कल्पना के घोडों के सवार।
जो राजकुमारी के महल में
प्रवेश के समय चलाएँगे
हीरे जड़ी तलवार।
महल के दरबान
चाय-पानी नहीं माँगेंगे,
राजकुमार राजा से
माँगेगा राजकुमारी
बिना कलर टीवी,
फ्रिज व कार के।
मेरी परी कथाएँ भरेंगी
आप लोगों की आँखों में
आशाओं के रंग।
उन्हीं रंगों के फूल खिलेंगे
स्वप्नों की बेल में
यथार्थ की भूमि पर।
इसीलिए मैं
आज से रचूँगा
केवल परी कथाएँ।

९ नवंबर २००६

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter