अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में नीरज कुमार नीर की रचनाएँ-

नई रचनाओं में-
द्रविड़ देश में बारिश
प्रेम में
मुक्ति
विस्मृति

छंदमुक्त में-
अवतार अब जरूरी है
औरत और नदी
उड़ो तुम
काला रंग
जन गण मन के अधिनायक
जहरीली शराब
दीया और चाँद
न जाने कब चाँद निकलेगा
परंपरा
सपने और रोटियाँ
सुख का सूरज
सुखद स्मृतियाँ

स्मृति
हर्ष और विषाद

 

द्रविड़ देश में बारिश  

यह बारिशों के लौटने का समय है
आदि योगी की जटाओं को
भिगोकर
मेघों के रथ पर सवार
ये लौट जाना चाहते हैं
शीघ्र अति शीघ्र अपने घर
जैसे लौटते हैं
विद्यालय से बच्चे
प्रतीक्षारत अपनी माँओं के पास

रास्ते भर छुप्पन-छुपाई, पकड़म-पकड़ाई
खेलते हुये
भागते हुये,
कभी सरपट दौड़ते हैं,  
कभी ठहर कर देखने लग जाते हैं
व्योम से धरा का विहंगम दृश्य...  

द्रविड़ देश के किसान
खेतों को कर रहे हैं तैयार
धान की फसल के लिए....
 
बड़ी–बड़ी सींगों वाले बैल
लगा रहे हैं अपना पूरा ज़ोर
धरती की परत को उलटने में
मानो होना चाहते हों उऋण
मानव जाति के किसी कर्ज से

हजारों वर्षों से धरती
मातृत्व भाव से बंधी
बीजों के बदले दे रही है फसल
 
वापस लौटती हुई बारिश  
द्रविड़ देश में धान के खेतों पर
खाली कर जाएगी अपना झोला
जैसे बच्चे अपना बचा हुआ टिफ़िन
घर जाने के पहले ही
खाली कर देते हैं
ताकि माँ को न देना पड़े जवाब

१ जुलाई २०२३

 

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter