अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में महेशचंद्र द्विवेदी की
रचनाएँ -

नई रचनाएँ-
अनस्तित्व का सत्यापन
अवसाद
तुम

छंदमुक्त में
आतुर आकाश
ऊर्जा का स्पंदन
एंटी वर्ल्ड
एक नास्तिक का स्वत्व
गणतंत्र की आत्मा
चिता का प्रकाश
जब जब आएगा सावन
तेरा यह रोम रोम
नौकरी का विज्ञापन
प्रवासी चिन्ता
पंछी की परछाँई
ब्रह्मांड में तारतम्य
भीमबैठका के भित्तिचित्र
मैं वह बादल हूँ
युवमन
यह मन क्या है

वृत्तस्वरूप संसार
शरत की कथाओं की तरह
शापित सा मन

हास्य व्यंग्य में
मोनिका को रोना क्यों आता है
लाइलाज मर्ज़
हॉट ब्लोअर
डेंगू
हाकिम सस्पेंशन में है

संकलन में
होली है-
होली पर रक्षाबंधन

  भीमबैठका के भित्ति-चित्र

भीमबैठका की गुफाओं की भित्तियों में
चित्रित है आदिकाल का इतिहास
प्रारंभिक मानव के
सरल हाथों ने उन्केरा है इनमे
मानव एवं प्रकृति का सहज सहवास

जैसे मनुष्य, पशु, पक्षी
सभी थे प्रकृति के मित्र

पत्थरों पर खिंची हैं
आड़ी-तिरछी सहज सी रेखाएँ
आदिम मनुष्य का सरल प्रयत्न हैं
पर मिटा नहीं सकीं हैं इनको
अनगिनत बरखायें

किस बूटी के रंग लिए
किस तूलिका से खींचे थे चित्र

होता है रोमांच मुझे यह सोचकर
क्या रहते थे इन्ही में
वस्त्रहीन पुरुष व ललनाएँ
कैसी थी संस्कृति वह
कैसी थीं मानव की लालसाएँ

अतीत के जीवन के दर्पण हैं
भित्ति पर खिंचे ये चित्र

सुदूर पर्वतों के वन का
यह निर्जन एकांत
मन को करता है
कभी उद्विग्न, कभी शांत
मन सोचता है संभवतः मैंने ही कभी
खींचे हों ये आड़े-तिरछे चित्र

मैं देख रहा हूँ भीमबैठका की
गुफाओं के भित्ति-चित्र

२६ अक्तूबर २००९

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter