अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में प्रवीण पारीक अंशु की रचनाएँ—

अंजुमन में—
दीवानों का हाल
शायरी की किताब
सागर में हूँ
सुर में गीत
है कौन
 


 

 

दीवानों का हाल

दीवानों का हाल‌ न पूछो
कैसे गुज़रा‍‌ साल, न पूछो

रेंग रहे हैं जैसे - तैसे
हम कछुओं की चाल‌‌ न पूछो

बैठे थे हम जिस पर, आख़िर
क्यों काटी वो डाल, न पूछो

सुलझाने में उलझ गया है
जीवन का जंजाल न पूछो

गाने दो कुछ नग़में दिल से
सुर मत पूछो, ताल न पूछो

लाख चुभो दो तीखे खंज़र
चुभते मगर, सवाल न पूछो

१ जून २०२३

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter