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गीत

अंजुमन में—
आदतें उसकी
उड़ते हैं हज़ारों आकाश में
क्यों न महके
कर के अहसान
कितनी हैरानी
गुनगुनी सी धूप
घर पहुँचने का रास्ता

चेहरों पर हों
छिटकती है चाँदनी
ज़ुल्मों का मारा भी है
तितलियाँ
तुमसे दिल में
धूम मचाते
नाम उसका
नित नई नाराज़गी
पंछी

बेवजह ही यातना
मन किसी का दर्द से
मुझसे मेरे जनाब
मुँडेरों पर बैठे कौओं
सुराही
हम कहाँ उनको याद आते हैं
हर एक को
हर किसी के घर का

संकलन में- प्यारी प्यारी होली में

 

कितनी हैरानी

कितनी हैरानी की यारों बात है
जेठ में बरसात ही बरसात है

बात हो तो हर किसी की बात हो
क्यों सभी में एक की ही बात है

जा रहे हैं आप ठुकरा कर इसे
दिल से बढ़कर और क्या सौगात है

खिल उठे हैं फूल खुशबू से भरे
आज दिल में प्यार वाली बात है

भाग्यशाली क्यों ना समझें ख़ुद को वो
उसके सर पर हर किसी का हाथ है

आप पत्थर से करें या ईंट से
दोस्तों आघात तो आघात है

"प्राण" आओ छत पे हम टहलें ज़रा
प्यारी प्यारी चाँदनी की रात है

४ फ़रवरी २००८ 

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