अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में मंजुल मंजर की रचनाएँ-

अंजुमन में-
किसी बशर से
कैसे अंदाज़ लगे
दिल से तस्वीर
फिर से अच्छे हुए हालात
वो नफरतों से

 

दिल से तस्वीर

दिल से तस्वीर मिटा दोगे क्या?
दर्द सीने में दबा दोगे क्या?

ख़ुद को मजबूत दिखाने के लिए
अश्क आँखों में सुखा दोगे क्या?

दिल को देते हो तसल्ली झूठी
याद आए तो भुला दोगे क्या?

बावफ़ा था वो सँभाला न गया
बेवफ़ा है तो निभा लोगे क्या?

मान लेता हूँ बहुत सुंदर है
हुस्न पर जान लुटा दोगे क्या?

झूठे वादों ने मुझे तोड़ा है
मुझको इंसाफ दिला दोगे क्या?

गन्दगी दिल में भरी है जो वो
अबकी होली में जला दोगे क्या?

१ जून २०१९

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter