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अनुभूति में कृष्ण शलभ की रचनाएँ-

बाल गीतों में-
अमर कहानी
एक किरन
किरन परी
चले हवा
टेसू माँगे
धूप

अंजुमन में-
अगर सूरत बदलनी है
उसकी बातों पे
कहीं से बीज इमली के
चेहरे पर चेहरा
जाने हैं हम
हर तरफ़ घुप्प-सा

  किरन परी

चम-चम, चम-चम, चाँदी जैसे
पंख खोल इक किरन परी
रात मुझे सपने में जाने
कहाँ-कहाँ ले उड़ी फिरी

चटपट आसमान तक जा कर
झट नीचे आ जाती थी
जहाँ घूमती वहाँ-वहाँ का
सारा हाल बताती थी
नदियाँ, नाले, पर्वत, झरने
घूमे धरती हरी भरी

चंदा मामा जी-भर देखे
लेकिन सूरज नहीं मिला,
अगर कहीं मिलता, उससे भी
बढ़ कर लेते हाथ मिला
खिल-खिल करती मिली चाँदनी
थी तारों से घिरी-घिरी

धऱती, अंबर, सात समंदर
उड़ते-उड़ते कहती थी
देखो-देखो, वहाँ दूर इक
जादूगरनी रहती थी
जो आलू से शेर बनाती थी
मिर्ची से सोन चिरी

४ जनवरी २०१०

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