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अनुभूति में कृष्ण शलभ की रचनाएँ-

बाल गीतों में-
अमर कहानी
एक किरन
किरन परी
चले हवा
टेसू माँगे
धूप

अंजुमन में-
अगर सूरत बदलनी है
उसकी बातों पे
कहीं से बीज इमली के
चेहरे पर चेहरा
जाने हैं हम
हर तरफ़ घुप्प-सा

 

कहीं से बीज इमली के

कहीं से बीज इमली के, कहीं से पर उठा लाई
ये बच्ची है बहुत खुश, एक दुनिया घर उठा लाई

दिसंबर छह से पहले प्यार से मिलती थी सलमा से
शहर को क्या गई, बूढ़ी बुआ तो डर उठा लाई

अमीरे शहर गाफ़िल ही रहा जिनकी ज़रूरत से
उन्हीं को रात में फुटपाथ के बिस्तर उठा लाई

किया क्या रात ने, हम पूस की सर्दी के मारे हैं
भला हो सुबह का, जो धूप की चादर उठा लाई

बड़ी मुद्दत से तनहा हूँ, पलट जिसने नहीं देखा
उसी की चीख अंदर से मुझे बाहर उठा लाई!

२६ अक्तूबर २००९

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