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अनुभूति में अरुण तिवारी 'अनजान'  की रचनाएँ-

नई रचनाओं में-
अब इस तरह से मुझको
क्यों लोग मुहब्बत से
कुछ तो करो कमाल
नयन टेसू बहाते हैं
पहले से नहीं मिलते

अंजुमन में-
अगरचे मुहब्बत जो धोखा रही है
आग
कहने पे चलोगे
गम ने दिखाए ऐसे रस्ते
दिल में गुबार
बड़ी मुश्किल-सी कोई बात
ये दुनिया

 

कुछ तो करो कमाल

कुछ तो करो कमाल, नया साल आ गया।
मिट जायें सब मलाल, नया साल आ गया।

भूखा न कोई सोये, न प्यासा रहे कोई,
पड़ने न दो अकाल, नया साल आ गया।

ख़ुशहाल हो ये देश, हमारा सभी तरह,
हो जाये माला-माल, नया साल आ गया।

छायें घटायें चारों, तरफ़ आसमान में,
भर जायें सब ही ताल, नया साल आ गया।

दिल में न रंजिशें हों, रहें मिल के हम सभी,
कोई चलें न चाल, नया साल आ गया।

बहरी सियासतें हैं, तो अंधा है न्याय भी,
किस से करें सवाल, नया साल आ गया।

दंगे–फ़साद ख़ून–ख़राबे हैं हर तरफ़,
अब अम्न हो बहाल, नया साल आ गया।

१० जून २०१३

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