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अभिव्यक्ति  

२७. १२. २०१०

अंजुमन । उपहार । काव्य संगम । गीत । गौरव ग्राम । गौरवग्रंथ । दोहे । पुराने अंक । संकलन । हाइकु
अभिव्यक्ति । हास्य व्यंग्य । क्षणिकाएँ । दिशांतर । नवगीत की पाठशाला

तीखी हवाएँ आ गईं

 

हाथ में कोड़ा लिये
तीखी हवाएँ आ गईं

फिर समय के वक्ष पर
छल छद्म के दलदल हुए
हाथ गीता पर रखा
फिर भी न गंगाजल हुए
1
आस्थाएँ क्रूरतम अभिशाप से
मुरझा गईं


यातनाओं के महाजन से
हमें भी ऋण मिला
अर्ध सामंती व्यवस्था का
यही है सिलसिला
1
लाल बहियों में उलझकर
पीढ़ियाँ घबरा गईं


राजपथ पर जो गए
वे लौटकर आए नहीं
सौम्यता पगडंडियों की
अब उन्हें भाए नहीं
1
लाजवंती धारणाएँ
किस कदर पथरा गईं

-- हरिशंकर सक्सेना

इस सप्ताह

गीतों में-

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हरिशंकर सक्सेना

अंजुमन में-

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गौरीशंकर आचार्य अरुण

छंदमुक्त में-

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अभिषेक झा

दिशांतर में-

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ज़्देन्येक वाग्नेर

पुनर्पाठ में-

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डॉ. शैल रस्तोगी

पिछले सप्ताह
२० दिसंबर २०१० के अंक में

गीतों में-
शलभ श्रीराम सिंह

अंजुमन में-
गौतम सचदेव

छंदमुक्त में-
नंद भारद्वाज

छंद में-
डॉ. हरदीप संधु

पुनर्पाठ में-
सत्येश भंडारी

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प्रकाशन : प्रवीण सक्सेना -|- परियोजना निदेशन : अश्विन गांधी
संपादन¸ कलाशिल्प एवं परिवर्धन : पूर्णिमा वर्मन
-|- सहयोग : दीपिका जोशी
     
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