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अनुभूति में रुचि राजपुरोहित तितिक्षा
की रचनाएँ

नन्ही परी
रंग चटकीला
संघर्ष
 

 

नन्ही परी

देख तेरे आँगन आई नन्ही परी
हर तरफ़ से देखो
वह प्रेम से भरी,
सुनकर उसकी कोयल-सी आवाज़
चला आए तू उस आग़ाज़
जहाँ वह खेल रही
देख तेरे आँगन
आई नन्हीं परी,
वह ले जाती तुझे
किसी और लोक में
जब होती वह
तेरी कोख में
तेज़ आवाज़ सुन
वह दुनिया से डरी
देख तेरे आँगन
आई नन्हीं परी,
रौनक वह आँचल
में लेकर आई,
पास है उसके
चंचलता की झांई
जिसको छूकर
तू हो गई हरी
देख तेरे आँगन
आई !!नन्ही परी

७ जुलाई २००८

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