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अनुभूति में किशोर दिवसे की रचनाएँ

छंदमुक्त में—
और मैं लिखता हूँ कविता
किया है कभी अहसास
नल
मन और मस्तिष्क
स्वयंभू-युग पुरुष
 

 

नल

वाह रे इंसान!
मेरी सुरक्षा करना तो दूर
ले गया टोंटी उखाड़कर
तुम्हारे ही समाज का एक
सरफिरा सा सदस्य
बहता रहा पानी निरंतर
कितना गैर जिम्मेदार रवैय्या!
तुमसे भला था वह बंदर
जिसने ठूँस दी खुले गले में
लकड़ी की एक खपच्ची
बंद हो गया बहता पानी
बंदर होकर भी जिम्मेदार
क्यों करते हैं ऐसी असभ्यता
आज के ये धृष्ट इंसान!

२३ मार्च २०१५

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अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

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