विजयदशमी की कविताओं का संकलन
 

 

आ गया पावन दशहरा

फिर हमें संदेश देने
आ गया पावन दशहरा
संकटों का तम घनेरा
हो न आकुल मन ये तेरा
संकटों के तम छटेंगें
होगा फिर सुंदर सवेरा

धैर्य का तू ले सहारा
द्वेष हो कितना भी गहरा
हो न कलुषित मन यह तेरा
फिर से टूटे दिल मिलेंगें
होगा जब प्रेमी चितेरा
फिर हमें संदेश देने
आ गया पावन दशहरा

बन शमी का पात प्यारा
सत्य हो कितना प्रताड़ित
रूप उसका और निखरे
हो नहीं सकता पराजित
धर्म ने हर बार टेरा
फिर हमें संदेश देने
आ गया पावन दशहरा

--सत्यनारायण सिंह


 

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