वसंती हवा

वसंत घर आ गया
कन्हैयालाल नंदन

 

अतसि नील गोटे की
सरसों सी पीली-पीली
पुण्य पीत साड़ी में वेष्टित
नवनीत गात
कोंपलों-सी रक्त आभ अधरों पर लिए हुए
तार झीनी बोली में
कोयल-सा गा गया।
क्षण क्षण बदलती सौंदर्य की छायाओं-सा
जीवन के पतझड़ में
कोई मुस्का गया
वासंती छवि का
समंदर लहरा गया
लगा
कि जैसे वसंत घर आ गया।

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