अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में स्वयं दत्ता की रचनाएँ

छंदमुक्त में-
अनजान
अभी तो सिर्फ दीया जला है
चाह 
निवेदन
रास्ते
 

 

निवेदन

कल कोहरा युक्त अस्पष्ट शाम
मैं तनहा अपने घर से चला
जहाँ मिले थे पहली बार
वह पगडंडी स्वागत करता मिला

वो सूखे पलाश
की मैं तलाश
थे तुमपर अर्पण
मेरा प्रथम निवेदन

वह बाग दिखा
जहाँ फूलों में
बिछे मेरे प्रेम और आँसू
खुशबू और ओस रूप में

नयन पोंछ आगे बढ़ा
हमसाया साथ छोड़ चला
साये को खोजते मैं
उस महामार्ग पर फिर चला

विस्तृत वृहत उन राहों पर
हमारे पदचिन्ह अंकित है
मेरे मुस्कानों कि गूँज हवा में
एक और निवेदन चित्रित है

खोजता चौराहे पर आ पहुँचा
मंथर हो चुकी मेरा चलन
हवा के झोंकों में पाया गूँजता
'अलविदा' मेरा अंतिम निवेदन

९ मई २००४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter