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अनुभूति में संजय सागर की रचनाएँ-

कविताओं में-
एक भोली-सी गाय
एक लड़की मुझे सताती है
कभी अलविदा न कहना
कल हो न हो
तेरी याद आती है
न जानूँ कि कौन हूँ मैं

 

तेरी याद आती है

मुझे अब भी तेरी याद आती है।
कभी हँसाती तो कभी रुलाती है।
तनहाई में चुपके से आकर
अक्सर सताती है।

मुझे अब भी तेरी याद आती है
वो तेरा मुसकुराना अपनी पलकों
से बताना, तेरी हर एक अदा
मुझको कितना लुभाती है।
पर क्या करूँ

मुझे अब भी तेरी याद आती है।
तुम्हें तो वो याद ही होगा, तुम्हारी
पलकें भीग जाती थी।
मुझे लगता था
शायद तुमको मेरी याद आती थी।
अब पता चला है, मुझको
तुझे न मेरी याद आती थी, न ही अब
मेरी याद आती है
पर मैं सच बताऊँ तुमको
मुझे अब भी तेरी याद आती है
माना हमने की आप भुला चुके हो हमें
तो फिर अब क्यों रुलाते हों
नहीं रह सकते हो आप पास हमारे,
तो अपनी यादें क्यों छोड़ जाते हो।
तेरी ये यादें दिलबर हमको,
हर वक्त रुलाती है।
कभी हवा का झोंका बनकर, कभी
बारिश की बूंदें बनकर,
दिल में समाती है।
माना कि ये आखिरी साँस है हमारी
पर क्या करुँ
मुझे अब भी तेरी याद आती है।

9 दिसंबर 2007

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