अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में हिना गुप्ता की रचनाएँ-

छंदमुक्त में-
चाहत
सपना
जिन्दगी

चाहत

जब लिख जाती है गोली
नियति किसी की
रोती होगी करूणा
सर झुकाए कहीं
उस गोली की गति
नापना चाहती हूँ।
बस शांति चाहती हूँ।

जब अट्टहास करती है घृणा
करूणा की दरिद्रता पर
सुना है विजयी होता है तम
तब उजाले पर
घृणा की प्रचंड अनल
कांतिहीन करना चाहती हूँ
शांति चाहती हूँ।

जब घायल होती है मानवता
तरूणाई भटकती सी लगती है
सूखे अँधेरे पर खिल आई
मुस्कान सिसकती सी लगती है
मानवता के भग्नावशेषों में
कुछ फूल चुनना चाहती हूँ
शांति चाहती हूँ।
बस शांति चाहती हूँ।।

२४ अगस्त २००४

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter