अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में पीयूष पाचक की रचनाएँ
नई कविताएँ-

नई रचनाएँ-
चार व्यंग्य रचनाएँ

हास्य व्यंग्य में-
औरतें कुछ परिभाषाएँ
कारनामे
चार फुलझड़ियाँ
चिकने घड़े
तीन हंसिकाएँ
प्रश्नवाचक चिह्व
प्रवृत्ति
प्रेम व्यथा
फ्रंट पेज पर
बस चल रही है
बीमारी
महान भारत
राजनीति
रावण के राज में
वायदों की छुरी
संयुक्त परिवार
संसद
साइज़

  तीन छोटी कविताएँ

बस चल रही है

सब तरफ घपले-घोटाले,
टेलीफोन से लेकर
चारे तक हर आइटम खाले,
गरीबों की भैंस पानी में
अमीरों की दाल गल रही है,
सरकारें चलती नहीं
बस चल रही है!

राजनीति

त्याग नहीं
सुविधा है
मूर्ख बनाने की
विधा है।

चिकने घड़े

गरीबों के घड़े
सूखे पड़े हैं,
हम उन्हें मितव्ययी
बनाने पर अड़े हैं,
कौन पचड़े में पड़े
नेता सारे
चिकने घड़े हैं।

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter