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अनुभूति में डॉ. तारादत्त निर्विरोध की रचनाएँ-

 

नए गीतों में-
एक अलग हाशिया
चितराम यादों के
शब्दों के पहरे
सुबह सुबह

गीतों में-
झरते हैं फूल-पात
थक गया हर शब्द
धूप की चिरैया
पानी का गीत
सुबह-सुबह

संकलन में-
ज्योतिपर्व- यादों के दीप
होली है- फागुन और बयार
 

 

पानी का गीत

पानी के दरपन पे यों
कंकरी न मारो
बिंबों का
जीवन बिखर जायेगा

पानी के भीतर भी
रहता है पानी,
पानी के ऊपर भी
बहता है पानी
सागर के
पानी को हाथों से तोला तो
लहरों का कंचन
उतर जाएगा

संभव न पानी के
पानी को आँकना,
लगता ज्यों अपने ही
भीतर से झाँकना
यौवन को
दोषों की आँखों से देखा तो
परदे का बचपन
उघर जायेगा

खारा या मीठा हो
पानी तो पानी,
गंदलाया फिर भी
सजल है कहानी
मोती तलाशोगे
निर्जल की तहों से तो
दलदल का दर्शन
उभर जाएगा

८ सितंबर २००८

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