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अनुभूति में शलभ श्रीराम सिंह की रचनाएँ— 

गीतों में-
चंपा ने
जलकुंभी
ताल भर सूरज
दिन निकलता है
स्वतंत्र्योत्तर भारत


 

 

ताल भर सूरज

ताल भर सूरज--
बहुत दिन के बाद
देखा आज हमने
और चुपके से
उठा लाए--
जाल भर सूरज!

दृष्टियों में बिम्ब भर आकाश--
छाती से लगाए
घाट
घास
पलाश!

तट पर खड़ी बेला
निर्वसन
चुपचाप
हाथों से झुकाए--
डाल भर सूरज!
ताल भर सूरज...!


२० दिसंबर २०१०

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