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एक पंछी ढूँढता है
क्या कहें क्या ना कहें
जब भी लिखना जो भी लिखना
प्रेम में भीगे हुए कुछ फूल

सिकुड़ गई क्यों

गीतों में-
अब नहीं आतीं
एक तिनके का सहारा
नदी की धार सी संवेदनाएँ
बाहर आलीशान
मेरा छूट गया गाँव
है कौन जो भीतर रहता है

 

जब भी लिखना

जब भी लिखना जो भी लिखना
कुछ नया लिखना

जब कोई पूछे कि आँगन की
थकन का
क्या करें ?
तुम तो बस
कोयल –गौरैया
और बया लिखना

जब भी लिखना जो भी लिखना
कुछ नया लिखना

गम अपरिचित ने भी
बाँटे,पर
खुशी के दौर में
कौन अपना
साथ तेरे
खुश हुआ लिखना

जब भी लिखना जो भी लिखना
कुछ नया लिखना

३ फरवरी २०१४

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