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अनुभूति में राणा प्रताप सिंह की रचनाएँ -

अंजुमन में-
एक टूटे तार की
तुमने जब कुछ बात कही थी

बड़ी मेहनत से
मैं भीतर से
सुल्तान जो अपना है

गीतों में-
अनगढ़ मन
आई है वर्षा ऋतु
नया कोई गीत ले
रीत रही है प्रतिपल

 

अनगढ़ मन

अनगढ़ मन सपनों की दुनिया
रोज सजाता है
ढोल मंजीरे झांझ पखावज
साज बजाता है

मिलता जब कोई प्यारा सा
अंधियारे में उजियारा सा
उस प्यारे संग पंख पसारे
असमान में हो भिनसारे
उड़ता जाता है

उलझा संबंधों का धागा
रिश्तों पर बैठा हो कागा
संवादों की डोर थामकर
ताना बाना खींच तानकर
सब सुलझाता है

कभी चपल चपला सा चहके
कभी अलस की साँझ में दहके
बह जाता जीवन धारा में
जैसे नाव नदी में मांझी
खेता जाता है

२७ सितंबर २०१०

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