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तुम क्या जानो हम क्या जानें
नई करवट
बेटियाँ
रश्मि-पत्रों पर
रोशनी की याचना

गीतों में-
आ गया है मन बदलना
आलोचना को जी रही हँ
गाँव वृंदावन करूँगी
गीतों के हार
चलते चलते शाम हो गई

दर्पन है सरिता
पर्वत नदियाँ हरियाली
पानी लिख रही हूँ
बुन लिया उजियार मैने
मन अभी वैराग्य लेने
शरद प्रात का गीत
सूर्य सा मत छोड़ जाना

संकलन में—
ज्योति सत्ता का गीत   

 

 

रोशनी की याचना

गीत गाने का मुझे
अवकाश तो था ही नहीं पर
दीप कोई जल गया तो रोशनी की याचना की।

दूर तक फैली हुई थीं
भाग्य की अनजान राहें
साथ में बहता पसीना
और थीं लाचार आहें
जो अंधरों से न हारी उस अकेली किरण ने ही
बो दिए कुछ मधुर सपने और मंगल कामना की

फूल ही देने लगे जब
शूल का आभास मुझको
जिंदगी तब सामने आ
दे गई विश्वास मुझको
साँस ने देखा अदेखा जंगलों तक धुंध फैला
बूँद जो आई पलक पर सिंधु ने भी साधना की

हाथ अपने ही निरंतर
कर्ज पा भारी चुकाना
और धरती पर समूचे
आकाश को था झुकाना
एक ही झनकार थी जब आरती की वेदना की
प्राण के पाटल चुने तब मौन हो आराधना की

६ अप्रैल २००९

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