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अनुभूति में किशन सरोज की रचनाएँ-

गीतों में-
कसमसाई देह
तुम निश्चिन्त रहना
नदिया किनारे
नींद सुख की
बड़ा आश्चर्य है

बाँह फैलाए खड़े

 

 

बड़ा आश्चर्य है

रीझ सुरभित हरित वसना
घाटियों पर
व्यंग्य से हँसते हुए
परिपाटियों पर

इंद्रधनु सजते सँवरते हैं
तुम्हारा मन नहीं छूते
बड़ा आश्चर्य है !

वृक्ष, पर्वत, नदी,
बादल, चाँद-तारे,
दीप, जुगनू, देव-दुर्लभ
अश्रु खारे।

गीत कितने रूप धरते हैं
तुम्हारा मन नहीं छूते
बड़ा आश्चर्य है !

२५ नवंबर २०१३

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