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गीतों में-
अग्निगर्भा
अब तो जागिये
तीखी हवाएँ आ गईं
विकलांग प्रश्न
सदी की भूल
 

 

सदी की भूल

हो गया अभिशप्त फिर
तालाब का पानी
मछलियों को सूर्य का
आतंक डसता है

रोज जख्मी हो रहे हैं
अब कमल के फूल
पीढ़ियाँ ढोती रहेंगी
हर सदी की भूल
हादसा ही
दर्द का इतिहास लिखता है

नागफनियाँ पंखुरी पर
लिख रही कानून
इस व्यवस्था ने पिया है
आदमी का खून
सभ्यता का
शर्म से सिर आज झुकता है

२७ दिसंबर २०१०

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