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अनुभूति में पं. माखनलाल चतुर्वेदी की
रचनाएँ

गीतों में-
तुम मिले, प्राण में
पहचान तुम्हारी
मधुर-मधुर कुछ गा दो मालिक
ये प्रकाश ने
समय के समर्थ अश्व

अन्य छंदों में-
पुष्प की अभिलाषा
वर्षा ने आज विदाई ली

संकलन में-
वर्षामंगल - कैसा छंद बना देती हैं
ज्योतिपर्व- दीप से दीप जले

 

  तुम मिले प्राण में

तुम मिले, प्राण में रागिनी छा गई!

भूलती-सी जवानी नई हो उठी,
भूलती-सी कहानी नई हो उठी,
जिस दिवस प्राण में नेह बंसी बजी,
बालपन की रवानी नई हो उठी।
किन्तु रसहीन सारे बरस रसभरे

हो गए जब तुम्हारी छटा भा गई।
तुम मिले, प्राण में रागिनी छा गई।

घनों में मधुर स्वर्ण-रेखा मिली,
नयन ने नयन रूप देखा, मिली-
पुतलियों में डुबा कर नज़र की कलम
नेह के पृष्ठ को चित्र-लेखा मिली
बीतते-से दिवस लौटकर आ गए

बालपन ले जवानी सँभल आ गई।
तुम मिले, प्राण में रागिनी छा गई।

तुम मिले तो प्रणय पर छटा छा गई,
चुंबनों, साँवली-सी घटा छा गई,
एक युग, एक दिन, एक पल, एक क्षण
पर गगन से उतर चंचला आ गई।

प्राण का दान दे, दान में प्राण ले
अर्चना की अमर चाँदनी छा गई।

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