अंजुमन। उपहार। काव्य संगम। गीत। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। पुराने अंक संकलन। अभिव्यक्ति। कुण्डलिया। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर

अनुभूति में स्वाती भालोटिया की रचनाएँ-

नई रचनाएँ-
चाँद रात और ठंडा मौसम (हाइकु में)

हाइकु में-
दस हाइकु

कविताओं में-
चार छोटी कविताएँ- मन मृत्तिका, मन नमन, प्रेम तुम्हारा, जो तुम आ जाते एक बार

 

 

चाँद रात और ठंडा मौसम

कोहरा ओढ़े
छिप के आई रात
चाँद तकने

ख्वाब क्या देखा
कि सजा में तुमने
नींदें चुरा लीं

गीली सी रात
तारों की रस्सी पर
सुखाने डालूँ

चाँद का छल
रात सुबकती है
भोर जन के

ठंडा मौसम
गोद में गर्म प्याली
चाय बागान

ठंडी पोरों को
गुनगुनाती धूप
हौले से तापे

दुग्ध की धारा
काई का उबटन
प्रकृति वधू

निर्झर धारा
काई का उबटन
प्रकृति वधू

प्रीति का पन्ना
तुम चित्र बनना
मैं रेखाक्रम

महकी हवा
मौलसिरी महकी
चहका मन

मुश्किलों में वे
भूल गए क्यों मुझे
सरलता से

रात की काई
स्मृतियों का सूरज
फिर फिसला

रोज कहती
भूल जाऊँगी तुझे
रोज भूलती

वृक्ष की गोद
टहनी का पालना
पाखी चिहँके

सागर सुने
लहरों का संगीत
चाँद सुनाये

१९ अगस्त २०१३

इस रचना पर अपने विचार लिखें    दूसरों के विचार पढ़ें 

अंजुमन। उपहार। काव्य चर्चा। काव्य संगम। किशोर कोना। गौरव ग्राम। गौरवग्रंथ। दोहे। रचनाएँ भेजें
नई हवा। पाठकनामा। पुराने अंक। संकलन। हाइकु। हास्य व्यंग्य। क्षणिकाएँ। दिशांतर। समस्यापूर्ति

© सर्वाधिकार सुरक्षित
अनुभूति व्यक्तिगत अभिरुचि की अव्यवसायिक साहित्यिक पत्रिका है। इसमें प्रकाशित सभी रचनाओं के सर्वाधिकार संबंधित लेखकों अथवा प्रकाशकों के पास सुरक्षित हैं। लेखक अथवा प्रकाशक की लिखित स्वीकृति के बिना इनके किसी भी अंश के पुनर्प्रकाशन की अनुमति नहीं है। यह पत्रिका प्रत्येक सोमवार को परिवर्धित होती है

hit counter